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खेवट नंबर

बिहार भूमि दाखिल-खारिज नियमावली, 2012: पुरानी बनाम नई जमाबंदी पंजी का तुलनात्मक अध्ययन

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जमींदारी उन्मूलन के बाद से बिहार में जमीन के रिकॉर्ड (जमाबंदी पंजी) का संधारण खास महल हस्तक के पुराने प्रपत्रों के अनुसार किया जा रहा था। इस पुरानी व्यवस्था की संरचना में कई गंभीर कानूनी और व्यावहारिक त्रुटियां थीं, जिसके कारण राजस्व अभिलेखों का संधारण ठीक से नहीं हो पा रहा था।  इन कमियों को दूर करने के लिए वर्ष 2012 की नई नियमावली के तहत प्रपत्र-II (अंचल खाता पंजी / पंजी-II) का एक नया स्वरूप लागू किया गया। इन दोनों व्यवस्थाओं में चार सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी अंतर निम्नलिखित हैं: 1. खाता और खेसरा का कॉलम • पुरानी जमाबंदी पंजी: इसमें जमीन की खाता संख्या और खेसरा (प्लॉट) संख्या को अलग-अलग दर्ज करने के लिए कोई विशिष्ट और समर्पित कॉलम उपलब्ध नहीं था, जिससे जमीन की पहचान करने में भारी विसंगति होती थी। • नई जमाबंदी पंजी: इसमें प्रत्येक रैयत की जमीन के लिए विशिष्ट खाता संख्या और खेसरा (प्लॉट) संख्या को स्पष्ट रूप से दर्ज करने के लिए अलग से कॉलम बनाए गए हैं, जिससे जमीन की पहचान एकदम सटीक हो जाती है। 2. प्लॉट-वार रकबा (क्षेत्रफल) • पुरानी जमाबंदी पंजी: इसमें जमीन का प्लॉट-वार...

जमाबंदी पंजी का नया अवतार: बिहार दाखिल-खारिज नियमावली का प्रपत्र -II

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बिहार भूमि दाखिल-खारिज नियमावली, 2012 के तहत संधारित की जाने वाली पंजी-II (अंचल खाता पंजी या जमाबंदी पंजी) का नया प्रारूप राज्य के राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, वैज्ञानिक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। जमींदारी उन्मूलन के बाद से लागू पुरानी व्यवस्था (खास महल हस्तक के प्रपत्रों) की गंभीर त्रुटियों को दूर करते हुए इस नए प्रारूप को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, ताकि भूमि विवादों को जड़ से खत्म किया जा सके।            बिहार दाखिल-खारिज नियमावली: पंजी-II के नए प्रारूप की विशेषताएँ  भूमि की सटीक पहचान: खाता, खेसरा, रकबा और चौहद्दी इस नए प्रारूप की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें जमीन के प्रत्येक टुकड़े की पहचान को पूरी तरह अकाट्य बना दिया गया है। नई पंजी-II में निम्नलिखित विवरणों के लिए विशिष्ट और समर्पित कॉलम दिए गए हैं: खाता और प्लॉट (खेसरा) नंबर: प्रत्येक रैयत की जमीन के लिए स्पष्ट खाता और विशिष्ट प्लॉट नंबर दर्ज करने का अलग कॉलम है। प्लॉट-वार रकबा (क्षेत्रफल): पुरानी व्यवस्था की तरह कुल एकमुश्त जमीन लिखने के ...

जमाबंदी पंजी और राजस्व अभिलेखों को सुधारने और संरक्षण का एक विफल प्रयास :बिहार अभिधारी धृति (अभिलेख का अनुरक्षण) अधिनियम, 1973 [1974-2012]

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चूंकि बिहार में जमींदारी उन्मूलन के बाद जमाबंदी पंजी का संधारण खास महल हस्तक (Khas Mahal Manual) के प्रपत्र के अनुसार किया जा रहा था, जिसमें कई व्यावहारिक त्रुटियां थीं और राजस्व अभिलेखों का संधारण ठीक से नहीं हो पा रहा था, इसीलिए राजस्व प्रशासन को व्यवस्थित करने के लिए बिहार अभिधारी धृति (अभिलेख का अनुरक्षण) अधिनियम, 1973 लाया गया। यह अधिनियम व्यावहारिक रूप से 1974 के दौरान लागू हुआ और इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में बटाईदारों, काश्तकारों और रैयतों की जमीन के मालिकाना हक और लगान से जुड़े अभिलेखों का निरंतर अनुरक्षण करना था। इस अधिनियम की सबसे बड़ी खूबी और इसका अंतिम उद्देश्य यह था कि इसके तहत रैयतों को बैंक की पासबुक की तरह एक 'खाता पुस्तिका' उपलब्ध कराई जानी थी। इस खाता पुस्तिका में रैयत की जमीन का पूरा ब्योरा, खाता, खेसरा, रकबा और समय-समय पर होने वाले दाखिल-खारिज की प्रविष्टियाँ दर्ज होनी थीं, ताकि रैयत को अपनी जमीन के विवरण के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके साथ ही अंचल अधिकारी को गांवों के नक्शों के साथ निरंतर खतियान और रैयत लेजर रजिस्ट...

बिहार में जमाबंदी पंजी का संधारण (1950- 2012 )इसकी खामियां.

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सन् 1950 में जमींदारी प्रथा की समाप्ति के बाद, बिहार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर नागरिक की भूमि का प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार करना और लगान वसूली को सुव्यवस्थित करना था। इसके लिए बिहार सरकार के खास महल मैनुअल के नियमों के तहत 'पंजी-II' (अभिधारी लेजर) को आधार बनाया गया। यह प्रारूप मुख्य रूप से एक वित्तीय और प्रशासनिक रजिस्टर था। इसके शीर्ष पर रैयत का नाम, खाता और विशिष्ट जमाबंदी नंबर दर्ज होता था, जबकि निचले हिस्से को 16 अलग-अलग कॉलमों में बांटकर पिछले 4 से 5 वर्षों के लगान, स्थानीय सेस (उपकर) के बकाए, चालू मांग (हाल) तथा अग्रिम भुगतान का लेखा-जोखा रखा जाता था। छह दशकों से भी अधिक समय तक इस प्रारूप ने राज्य के राजस्व ढांचे को संभाले रखा और जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के बाद नए मालिकों के नाम दर्ज करने का यह इकलौता कानूनी रजिस्टर बना रहा। समय के साथ जनसंख्या बढ़ी और जमीनों का विखंडन हुआ, लेकिन रजिस्टर का यह प्रारूप पुराना ही रहा, जिसके संचालन में कई गंभीर कमियां उभर कर सामने आईं। यह रजिस्टर पूरी तरह अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी के पास भौतिक रूप में रहता था। ...

जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान ,राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की एक अच्छी पहल‌15.9.26 से 31.10.26 ,

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जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान आधुनिक भू-अभिलेख प्रबंधन की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले भूमि स्वामियों को उनके अधिकारों के प्रति आश्वस्त करना और डिजिटाइज्ड भूमि रिकॉर्ड्स में मौजूद तकनीकी विसंगतियों को पूरी तरह दूर करना है। बिहार सरकार द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए 15 सितंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक की तिथि निर्धारित की गई है, जिसके तहत पूरे राज्य में इसे मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है।    ‌ आम तौर पर देखा गया है कि पारंपरिक रिकॉर्ड्स को जब डिजिटल स्वरूप में बदला गया, तो कई जगहों पर खाता संख्या, खेसरा या प्लॉट नंबर, रकबा और लगान जैसी बुनियादी जानकारियां छूट गईं या त्रुटिपूर्ण दर्ज हो गईं। ऐसी समस्याओं के कारण आम नागरिकों को अपनी ही भूमि की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण प्राप्त करने अथवा अन्य विधिक कार्यों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस अभियान के माध्यम से सरकारी तंत्र स्वयं सक्रिय होकर और स्वतः संज्ञान लेकर इन सभी कमियों को दूर ...

अब घर बैठे प्राप्त करें भूमि अभिलेखों की डिजिटल अभिप्रमाणित प्रति

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बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने डिजिटल गवर्नेंस (E-Governance) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के नागरिकों को अपनी जमीन से जुड़े राजस्व अभिलेखों (Land Records) की डिजिटल अभिप्रमाणित (Digitally Certified) प्रति प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों या कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विभाग द्वारा शुरू किए गए भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन और बेहद आसान हो गई है। कार्यालय जाने की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब भौतिक रूप (Physical Copy) से कार्यालय जाकर दस्तावेज प्राप्त करने की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। नागरिक अब दुनिया के किसी भी कोने से सिर्फ इंटरनेट के जरिए अपने आवश्यक भूमि दस्तावेज डाउनलोड कर सकते हैं। घर बैठे डिजिटल प्रति पाने के 5 आसान चरण: लॉगिन और पंजीकरण: सबसे पहले आधिकारिक भू-अभिलेख पोर्टल https://bhuabhilekh.bihar.gov.in/ पर जाएं। नए उपयोगकर्ता (New User) अपना पंजीकरण करें और अपने मोबाइल नंबर के जरिए ओटीपी (OTP) से लॉगिन करें। भूमि विवरण दर्ज...

जमाबंदी क्या है ? ( विल्सन ग्लौसरी के अनुसार)

किसी estate गांव या जिला के राजस्व आकलन की बंदोबस्ती का विवरण . एक जिला या राजस्व गांव का रेंट रौल . किसी राजस्व गांव के होल्डिंग की पंजी . एक विवरण जो यह दर्शाता हो की भू-राजस्व लगान कितना है और इसका किस तरह से आकलन किया गया है. किसानों के साथ वार्षिक बंदोबस्ती का राजस्व का विवरण . ( रैयतवाड़ी सेटेलमेंट में) बंगाल(बिहार बंगाल उड़ीसा) में जमाबंदी में रैयत का नाम, उसकी जोत ,भूमि का प्रकार , उसका विस्तार, प्रति बीघा भू राजस्व, कुल लगान अन्य शेष जिसका भुगतान रैयत द्वारा जमींदार को किया जाना है का विवरण दर्ज रहता है.